अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह (इंटरनेशनल वीक ऑफ डेफ पीपल-आईयूडीपी) प्रत्येक वर्ष सितंबर माह के अंतिम पूर्ण सप्ताह (सोमवार से रविवार) तक मनाया जाता है। जिला चिकित्सालय देवास में जागरूकता कार्यक्रम और श्रवण जाँच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 83 हितग्राहियों के कान की जांच की गई। एक बालिका को कर्ण प्रत्यारोपण (कॉक्लियर इम्प्लांट) शल्य चिकित्सा हेतू चिन्हांकित किया गया। 2 हितग्राहियों को सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से श्रवण यंत्र प्रदान किए गए।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सरोजिनी जेम्स बेक ने बताया कि इस सप्ताह का उद्देश्य बधिर व्यक्तियों एवं श्रवण बाधित समुदाय के समक्ष आने वाली चुनौतियों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा समानता एवं समावेशन सुनिश्चित करने में सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) एवं श्रवण पुनर्वास के महत्व को रेखांकित करना है। वर्ष 2026 की थीम ‘‘डिक्लेयरिंग डेफ पीपल्स ह्यूमन राइट्स’’ है।

शिविर में कान की साफ-सफाई, कान की सुरक्षा और सेहत के प्रति जागरूकता के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि कानों की गलत तरीके से सफाई करना बहरेपन या सुनने की क्षमता कमजोर होने का एक बड़ा कारण बन सकता है। चिकित्सकों ने बताया कि कान अपनी सफाई खुद करने में सक्षम हैं।

कान में बनने वाला मैल कोई गंदगी नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है जो धूल, बैक्टीरिया और कीड़ों को कान के अंदर जाने से रोकता है। जब हम बात करते हैं या खाना चबाते हैं, तो जबड़े की हलचल से पुराना मैल अपने आप बाहर निकल आता है। हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम कानों के अंदर कुछ भी बाहरी वस्तु नहीं डालेंगे।

सही जानकारी और सुरक्षित आदतें अपनाकर हम खुद को और अपने परिवार को बधिरता के जोखिम से बचा सकते हैं।